Thursday, 9 August 2018

'अजनबी' तेरी ही थी कमी...


भारत में अभी 'स्ट्रेंजर ऑन रेंट' का चलन नहीं है । लेकिन वो दिन आने में कितना समय लगेगा, जब हम जापान की बुलेट ट्रेन को प्लेटफॉर्म से खड़े होकर आने वाली ट्रेन की तरह झांक कर देख रहे हैं...ट्रेन लेट है लेकिन बुलेट आ तो रही है न...जापान में ही 50 वर्षीय ताकानोबु निसीमोतो ने 2012 में ऑनलाइन ओसान रेंटल सर्विस शुरू की ।
Courtesy- CNN
अधेड़ मर्दों को रेंट पर देने की सर्विस ।ये अब धीरे-धीरे लोकप्रिय हो गई है । हालांकि इसे फिजिकल डिमांड से दूर रखा गया है। कहा जा रहा है ऐसे पुरुष मार्गदर्शन, भावनाओं के आदान-प्रदान के लिए काम करते हैं । 
सवाल एक ही है कि आखिर पैसे देकर कोई क्यों अजनबी के संग वक्त बीताना चाहेगा ? अधेड़ मर्द किराए पर लेना क्यों चाहेगा ?
सबसे पहले तो हमे उस बदलाव पर नजर डालना पड़ेगा जो इस तरह के बिजनेस आइडिया का जन्मदाता है ।
जापान में 40 पार कर चुके लोगों की निजी जिंदगी से निकले अनुभव ये भी है कि अगर आपकी जिंदगी में कुछ दिलचस्प ना होता रहे, तो आप मानसिक रूप से मर जाएंगे...लोग गंभीरता से जीते-जीते अपना नजरिया सीमित कर लेते हैं..
दरअसल ये महानगरीय जीवनशैली से पनपी विडंबनाएं हैं ।

कुछ ध्यान देने वाली बातें ये भी हैं-
1. जान-पहचान वाले में बात करने पर बात फैलने का डर का बढ़ना
2. बढ़ते अकेलेपन की मानसिक जरूरतें
3. भावनाओं की वेदना को हंसी-हंसी झेलने वाला
और
4. एक बार बात करने के बाद गले नहीं पड़ने का तनाव

स्ट्रेंजर ऑन रेंट भी इसी वजह से आई है । जीवन रुकता जो नहीं है । बहता है । किसी न किसी रुप में बहेगा । उसे पोषित करने लिए नई-नई चीजें भी सामने आ जाएंगी ।
ऐसा भी कह सकते हैं कि मर्जी का मामला जब बढ़ जाए । तो फिर ढंग बदल जाते हैं ।
एक रिसर्च के मुताबिक जापान में ऐसे यूथ की संख्या तेजी से बढ़ रही जो शादी नहीं करना चाहते ।

लेकिन अजनबी के साथ होना और किराए पर अजनबी को लेने में बहुत अंतर है ? अजनबी बहुत प्यारा भी लगता है । बिल्कुल गाने की तरह- ओ अजनबी तेरे लिए...मेरी जिंदगी में अजनबी का इंतजार है । लेकिन जैसे इसकी एंट्री होती है और जान पहचान बढ़ता है । राय बदल जाती है । दोनों का एक-दूसरे के प्रति नजरिया भी ।

कभी-कभी अजनबी घातक भी साबित होता है । भारत जैसे देश में होने वाली रेप की घटनाएं अजनबी से डराती हैं । जापान में शायद ये डर कम हो । पर 'किराए से मिलने वाले अजनबी' में डर वाली बात न के बराबर ही होती है । क्योंकि यहां कीमत चुकाई जाती है । रेंट पर आने वाला अजनबी एक इम्प्लाई ही होता है ।
खैर मनाइए,  नए तरह के इस बिजनेस की । एक अलग चाहत की । चाहत से याद आया- वो 'लिव इन रिलेशन' के किस्सों की । पहले इस रिश्ते में प्यार होता है, फिर कथित बलात्कार..और मामले थाने जाने लगते हैं.. 

लेकिन जापान वाला ये ट्रेंड बिल्कुल अलग है । इसमें नयापन भी है । वैसे इसके बारे में भी आगे सुन ही लेंगे । भारतीय वर्जन की कहानियां भी आ ही जाएंगी । और क्या कहूं । उनके लिए गाना गुनगुना देता हूं जो संस्कृति का झंडा लिए खड़े हैं-

आया समय बड़ा बेढंगा
नर होकर नाच रहा नंगा
देख तेरे संसार की हालत क्या हो गई भगवान..
कितना बदल गया इंसान ?



Wednesday, 8 August 2018

अब नहीं गूंजता

अब नहीं गूंजता 
संसद में

अब भी रहता हूं
खेत में, फुटपाथ पर
दम घुटता है
अस्पताल में, ट्रेन के डिब्बों में
सौ. गूगल










अब नहीं गूंजता 
संसद में 

दिखता हूं
कार की कांच से बाहर
उस झुग्गी में
रहता हूं
राशन की कतार में
मुआवज़े की आस में

अब नहीं गूंजता 
संसद में

बहता हूं
नारी अस्मिता के आंसू में
गंगा की धार में
बेरोजगारों के विचार में

अब नहीं गूंजता 
संसद में

खामोश हूं
टकटकी लगाए आंखों में
चेहरे पर खिंचती लकीरों में 
क्रोध के दबे अंगारों में
बदहवास से सवालों में 

अब नहीं गूंजता 
संसद में

- निशांत कुमार




Monday, 6 August 2018

दोस्त मेरा नेता है...


दोस्त मेरा नेता है
टिकट की आस में बैठा है

मेहनत में उसका तोड़ नहीं
फिर भी दल में शोर नहीं
 बात करूं तो उसकी
मुस्कुराता है
दूसरे की बात पर
मुहं बनाता है

दोस्त मेरा नेता है
टिकट की आस में बैठा है

सफेदी में जब से गया वो लौट
कुर्ता, पाजामा और हाफ कोट
कमीज, पेंट और जूते का बदल गया रंग
बोलने का भी  बदल गया उसका ढंग

दोस्त मेरा नेता है
टिकट की आस में बैठा है

दिखाता है 
दिल्ली में है उसकी पैठ
गाड़ी भी है बुलेट 
कहता है
चर्चा है उम्मदवारी की
इस बार जश्न तैयारी की

दोस्त मेरा नेता है
टिकट की आस में बैठा है

सुनने में आया 
टिकट कोई और ले गया
ताल ठोंक रहा था
मैदान कोई और मार गया

अब बर्दाश्त से बाहर हुआ
गुस्से से वो पागल हुआ
बदल लिया उसने पाला 
सोचा खुलेगा किस्मत का ताला

दोस्त मेरा नेता है
टिकट की आस में बैठा है

कतार यहां भी लंबी है
लगता है ये मंडी है
मेहनत का क्या मोल है ?
चिंता मत कर दोस्त 
फल जो मिले वही अनमोल है

दोस्त मेरा नेता है...

- निशांत कुमार

Saturday, 4 August 2018

2018 में 1971 का 'बेरोजगारों का गीत'


4 अगस्त को मध्य प्रदेश के जिलों में रोजगार मेलों की धूम रही । सरकारी तंत्र की मुस्कान से लगा कि बेरोजगारी को दूर करने के सार्थक प्रयास किए जा रहे हैं । राजनीति में पक्ष और विपक्ष की जंग तो चलती रहेगी  लेकिन शिवराज सरकार की मंशा अच्छी है ।
जब जितेंद्र माथुर ने अपनी आपबीती सामने रखी । फिर ज्यादा देर तक रोजगार मेले का असर जेहन में नहीं रह पाया ।

'रोजगार के नाम पर सरकार ठग रही है'
कैसे ?
'अभी देखो ये परीक्षा भी निरस्त हो गई'
कौन-सी ?
अरे मैंने फॉर्म भरा था.. 

मध्य प्रदेश पावर जनरेटिंग कंपनी लिमिटेड के तहत प्लांट एसिस्टेंड फॉर इलेक्ट्रिक पद के लिए परीक्षा होनी थी । उसे निरस्त कर दिया गया । चार-पांच दिन बीत चुके । कोई सूचना भी नहीं दी गई । परीक्षा के लिए जो 1000 रुपए फीस भरी थी उसका भी फिलहाल अता-पता नहीं है ।


 

जाहिर है अकेले जितेंद्र ही चिंता में नहीं है । संख्या हजारों में होगी । या फिर ज्यादा भी । इन लोगों का रोजगार का सपना अब सस्पेंस के हवाले है । और उधर रोजगार मेले से नए सपने दिखाने की शुरुआत भी कर दी गई है । लेटर ऑफ इंटेंट बांटे गए हैं । 

भारत दुनिया के सबसे युवा देशों में शुमार है । लेकिन रोजगार के नाम पर हवा-हवाई ही है ।
और क्या कहूं...2018 में 1971 में आई फिल्म मेरे अपने में गुलजार का लिखा गीत ही गुनगुना लेता हूं...

''हाल चाल ठीक ठाक है, सब कुछ ठीक ठाक है
B.A.किया है, M.A.किया, लगता है वो भी अंयवय किया
काम नहीं है, वरना यहाँ, आप की दुआ इस सब ठीक ठाक है...''




Friday, 3 August 2018

जमाना 'किकी'या रहा है (Kiki do you love me.) ...



चलती कार से निकलती हुई युवती
चलती कार के सामने डांस, फोटो सभार सोशल मीडिया






नये दौर का नया डांस
'किकी' पर लोग मार रहे चांस
चैलेंज का चढ़ा बुखार
हादसे का हो रहे शिकार

अमेरिका से आया है ये किकी
लोगों में बजने लगी सिटी
बच्चे. बूढे और नौजवान
कर रहे सब रोड पर डांस

चलती कार से निकलकर  
कला और क्रेज का प्रदर्शन
सच कहूं तो
ये अब बन गया है टेंशन

वायरल किकी का लगा रोग 
खंभों से टकराते, गिरते लोग
वाहन की चपेट में आने का डर
नहीं मानोगे तो जाओगे मर

दीवानगी डर से बड़ी
डांस रोके क्यों कोई 
कला से नहीं बैर
सलामत रहो, खैर 
(- निशांत कुमार)


क्या है 'किकी' ?

रैपर ड्रेक के गाने-  'किकी डू यू लव मी'- की इन दिनों धूम मची हुई है । इस गाने पर डांस चैलेंज का अमेरिका से लेकर भारत तक में भूचाल है । किकी डांस चैलेंज के तहत लोग ड्राइविंग सीट छोड़कर चलती कार से उतरकर डांस शुरू कर देते हैं। फिर डांस करते हुए अपनी सीट पर बैठ जाते हैं। इस दौरान कार की स्पीड 10 किमी प्रति घंटे रहती है । इतना ही नहीं कार में बैठा हुआ दूसरा साथी वीडियो बनाता है। ऐसे वीडियो को लोग सोशल मीडिया पर खूब शेयर कर रहे हैं।  किकी बेहद खतरनाक है और इससे कई तरह के हादसे हो चुके हैं..उत्तर प्रदेश, दिल्ली, पंजाब, मुंबई सहित कई राज्यों की पुलिस के लिए 'किकी डांस चैलेंज' सिरदर्द बन चुका है। वहीं, पुलिस अब सोशल मीडिया पर इस चैलेंज को रोकने के लिए अभियान चला रही है






Wednesday, 1 August 2018

सफाई का अतिवाद !


सफाई बहुत अच्छी आदत है । इसे अपने संस्कार में शामिल किया ही जाना चाहिए । लेकिन सफाई को लेकर हद पार करना अजीब है ।
चीन के फुजान की तस्वीर, फोटो सौजन्य-google

चीन में यूरिनल में खाना खाने की तस्वीर वायरल हुई है । कहा जा रहा है कि फुजान में एक कंपनी कर्मचारियों से सफाई को लेकर कमिटमेंट चेक कर रही थी । इस तरह तो ये गंदा ही कहा जाएगा । चाहे वो यूरिनल कितना ही क्लीन क्यों न हो ? 
आपका अंडरवियर तौलिया नहीं बन सकता । मुंह पोंछने के लिए तौलिया, रुमाल है । 

यूरिनल में खाना खाने पर यहां बवाल है । मगर कुछ होटल तो टॉयलेट थीम पर ही खुले हैं । जहां ऐसे बर्तनों में खाना खाने की होड़ भी है । 
मास्को का एक रेस्त्रां


ताइवान का एक रेस्त्रां






अहमदाबाद का एक कैफे











विचित्र कहकर किसी चीज का लुत्फ उठाने का ये ट्रेंड भी खूब है । किसी को ये अच्छा लगता है तो कई को नहीं । ये चलन अतिवाद की ओर इशारा नहीं तो क्या है ?  

वैसे इंडिया में भी स्वच्छता को लेकर सजगता बढ़ी है । अच्छी बात है । लेकिन जो नई-नई जागरूरकता से लबरेज है उनका अतिवाद भी बढ़ रहा है ।

लोग आवारा कुत्तों से ये उम्मीद करने लगे हैं कि वो अपना पिछवाड़ा ना दिखाएं । लोग पक्षियों से भी उम्मीद करने लगे हैं कि वो यहां-वहां ना करें । 
अपार्टमेंट में रहने वाले एक सज्जन से तो ये कहते सुना कि बारिश में ठीक से ऊपर जाया करो सीढ़ियों पर पैर के छाप पड़ जाते हैं ।
ऐसी सोच कहां ले जाएगी ? चीन के फुजान शहर की कंपनी की तरफ ही न । 
स्वच्छ समाज बनाइए, अतिवाद नहीं । बाकी तो सब समझदार है ही ।



Tuesday, 31 July 2018

प्रेमचंद सबके फेवरेट

मुझे कहानी पढ़ने की आदत प्रेमचंद ने ही लगाई । हिंदी का मतलब पहले मेरे लिए प्रेमचंद ही था । फिर बाद में कई और नाम जुड़े- रामधारी सिंह दिनकर, मैथिलीशऱण गुप्त, निराला, अज्ञेय, जयशंकर प्रसाद, महादेवी वर्मा, सुमित्रानंदन पंत, मनु भंडारी, रामवृक्ष बेनीपुरी, हरिवंशराय बच्चन, हजारीप्रसाद द्विवेदी, सुभद्राकुमारी चौहान, माखनलाल चतुर्वेदी- कई नाम हैं ।
इन सबमें सबसे सरल और मन में बैठ जाने वाली लेखनी प्रेमचंद की कही जा सकती है । छोटे-छोटे वाक्य, देशी मुहावरे, ग्रामीण परिवेश का चित्रण और पात्र  । कहानी को कहना प्रेमचंद के बेहतर शायद ही किसी को आएगा । 
कुछ यादगार अंश-
जन्म- 31 जुलाई 1880

(ईदगाह)
‘यह चिमटा कहाँ था?’
‘मैंने मोल लिया है.’
‘कै पैसे में?’
‘तीन पैसे दिए.’
अमीना ने छाती पीट ली. यह कैसा बेसमझ लड़का है कि दोपहर हुआ, कुछ खाया, न पिया. लाया क्या, चिमटा. सारे मेले में तुझे और कोई चीज़ न मिली जो यह लोहे का चिमटा उठा लाया?
हामिद ने अपराधी-भाव से कहा-तुम्हारी ऊँगलियाँ तवे से जल जाती थीं, इसलिए मैंने इसे लिया.
बुढ़िया का क्रोध तुरंत स्नेह में बदल गया, और स्नेह भी वह नहीं, जो प्रगल्भ होता है और अपनी सारी कसक शब्दों में बिखेर देता है. यह मूक स्नेह था, खूब ठोस ।

(ठाकुर का कुआं)
साहू का कुऑं गॉँव के उस सिरे पर है, परन्तु वहॉं कौन पानी भरने देगा ? कोई कुऑं गॉँव में नहीं है। जोखू कई दिन से बीमार हैं । कुछ देर तक तो प्यास रोके चुप पड़ा रहा, फिर बोला-अब तो मारे प्यास के रहा नहीं जाता । ला, थोड़ा पानी नाक बंद करके पी लूं । गंगी ने पानी न दिया । खराब पानी से बीमारी बढ़ जाएगी इतना जानती थी, परंतु यह न जानती थी कि पानी को उबाल देने से उसकी खराबी जाती रहती हैं । बोली-यह पानी कैसे पियोंगे ? न जाने कौन जानवर मरा हैं। कुऍ से मै दूसरा पानी लाए देती हूँ। जोखू ने आश्चर्य से उसकी ओर देखा-पानी कहॉ से लाएगी ? ठाकुर और साहू के दो कुऍं तो हैं। क्यो एक लोटा पानी न भरने देंगे? ‘हाथ-पांव तुड़वा आएगी और कुछ न होगा । बैठ चुपके से । ब्राह्मण देवता आशीर्वाद देंगे, ठाकुर लाठी मारेंगे दर्द कौन समझता है !

(उपन्यास- गोदान)
हर एक गृहस्थ की भाँति होरी के मन में भी गऊ की लालसा चिरकाल से संचित चली आती थी। यही उसके जीवन का सबसे बड़ा स्वप्न, सबसे बड़ी साध थी। बैंक के सूद से चैन करने या जमीन खरीदने या महल बनवाने की विशाल आकांक्षाएँ उसके नन्हें-से हृदय में कैसे समातीं !

प्रेमचंद ने 300 से अधिक कहानियाँ, कई उपन्यास, 3 नाटक, कई अनुवाद, बाल-पुस्तकें तथा लेख, सम्पादकीय, भाषण, भूमिका, पत्र आदि की रचना की ।


विनम्र श्रद्धांजलि

मेरी पहली किताब (MY FIRST BOOK)

साथियों, मैं ब्लॉग कम ही लिख पाता हूं, इसलिए नहीं कि लिखना नहीं चाहता । दरअसल मैंने लिखने का सारा वक्त अपनी किताब को दे दिया । एक विद्यार्थी...